18 अक्टूबर 2026

ग्रह गोचर 2027: गुरु, शनि, राहु-केतु और ग्रहण की सटीक तारीख़ें

2027 के बड़े गोचर सटीक तारीख़ों के साथ (IST, निरयण): कर्क में उच्च का गुरु, 3 जून को शनि मेष में, साढ़ेसाती का बदलाव, राहु मकर में और साल के पाँच ग्रहण।

गोचर2027राशिफल

2027 की पूरी तस्वीर पहले, ब्योरे बाद में: यह साल दो बड़े दरवाज़ों का है। पहला दरवाज़ा गुरु का है। साल के पहले आधे हिस्से में गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में रहता है, फिर सिंह लौटता है और 26 नवंबर को कन्या में प्रवेश करता है। दूसरा दरवाज़ा शनि का है: 3 जून को शनि मीन छोड़कर मेष में आता है। यह उसकी नीच राशि है, और इसी दिन साढ़ेसाती एक राशि आगे खिसक जाती है। साथ में राहु पूरे साल मकर में और केतु कर्क में है। और 2 अगस्त को इस सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण होता है, जो भारत में भी आंशिक रूप में दिखेगा।

नीचे की हर तारीख़ उसी ग्रह-इंजन से गिनी गई है जो इस साइट की जन्म कुंडली चलाता है, किसी और के पोस्टर से उतारी नहीं गई। समय IST में हैं और राशियाँ लहिरी अयनांश से निरयण (सिडेरियल) में, यानी वही ढाँचा जो पंचांग इस्तेमाल करता है। (दूसरे अयनांश किसी सीमा को एकाध दिन खिसका सकते हैं।)

2027 की मुख्य तारीख़ें

तारीख़ (IST) घटना स्थिति (निरयण)
10 जन मंगल वक्री 16°12′ सिंह
25 जन गुरु वक्री चाल में सिंह से वापस कर्क (उच्च) में 0° कर्क
6 फ़र वलयाकार सूर्य ग्रहण (भारत में नहीं दिखेगा) 23° मकर
9 फ़र – 3 मार्च बुध वक्री कुंभ → मकर
21 फ़र (भोर) उपच्छाया चंद्र ग्रहण 8° सिंह
1 अप्रै मंगल मार्गी 26°42′ कर्क
3 अप्रै गुरु–शनि त्रिकोण, सटीक 23° कर्क / मीन
13 अप्रै गुरु मार्गी 22°46′ कर्क
3 जून शनि मीन से मेष में (नीच) 0° मेष
10 जून – 5 जुल बुध वक्री मिथुन
26 जून गुरु कर्क से सिंह में 0° सिंह
12 जुल गुरु–शनि त्रिकोण, सटीक (अंतिम) 3° सिंह / मेष
18 जुल उपच्छाया चंद्र ग्रहण (बहुत हल्का) 2° मकर
2 अग खग्रास सूर्य ग्रहण (भारत में आंशिक) क़रीब 16° कर्क
9 अग शनि वक्री 3°39′ मेष
17 अग उपच्छाया चंद्र ग्रहण 30° मकर
7 – 28 अक्तू बुध वक्री तुला → कन्या
20 अक्तू शनि वक्री चाल में मेष से वापस मीन में 30° मीन
26 नव गुरु सिंह से कन्या में 0° कन्या
24 दिस शनि मार्गी 26°47′ मीन

बाक़ी सारे वक्री-मार्गी 2027 वक्री कैलेंडर में हैं, और हर अमावस्या-पूर्णिमा पूर्णिमा-अमावस्या कैलेंडर में।

गुरु गोचर 2027: उच्च का गुरु, फिर सिंह, फिर कन्या

गुरु साल की शुरुआत सिंह में करता है, पर 13 दिसंबर 2026 से वक्री है। पीछे चलते-चलते वह 25 जनवरी को फिर कर्क में आ जाता है, जो उसकी उच्च राशि है। परंपरा कर्क के गुरु को सबसे शुभ स्थितियों में गिनती है: ज्ञान, संतान, धर्म और परिवार की बढ़त का गुरु। गुरु 13 अप्रैल को 22°46′ कर्क पर मार्गी होता है, 26 जून को दोबारा सिंह में जाता है और 26 नवंबर को कन्या में प्रवेश करता है।

यानी 2027 में गुरु तीन राशियों को छूता है, और आपकी चंद्र राशि से वह जिस भाव में हो, परंपरा उसी विभाग में बढ़त पढ़ती है। चंद्र राशि से दूसरा, पाँचवाँ, सातवाँ, नौवाँ और ग्यारहवाँ गुरु शुभ माना जाता है। इसलिए एक ही साल में कई राशियों का गुरु-फल बदलता है। नीचे की तालिका अपनी राशि के लिए देखिए।

शनि गोचर 2027: 3 जून को मेष, और साढ़ेसाती का बदलाव

शनि साल भर का सबसे बड़ा नाम है। वह जनवरी से जून तक मीन में चलता है और 3 जून 2027 को सुबह 03:41 IST पर मेष में प्रवेश करता है। मेष शनि की नीच राशि है। परंपरा इसे अधीरता और अनुशासन की खींचतान पढ़ती है, जहाँ जल्दबाज़ी की क़ीमत चुकानी पड़ती है और धैर्य से बनी चीज़ टिकती है। फिर 9 अगस्त को वह वक्री होता है और 20 अक्तूबर को पीछे खिसककर मीन में लौट आता है। मेष में उसका पक्का प्रवेश 23 फ़रवरी 2028 को होगा।

इस बदलाव के साथ साढ़ेसाती एक राशि आगे बढ़ती है:

  • 3 जून तक (शनि मीन में): कुंभ का अंतिम चरण, मीन का मध्य (शिखर) चरण, मेष का प्रथम चरण।
  • 3 जून – 20 अक्तूबर (शनि मेष में): कुंभ की साढ़ेसाती उतरती है, मीन अंतिम चरण में, मेष शिखर पर, और वृषभ की साढ़ेसाती शुरू होती है।
  • 20 अक्तूबर से 23 फ़रवरी 2028 तक शनि फिर मीन में है, इसलिए पिछला अध्याय थोड़े समय के लिए दोबारा चालू हो जाता है।

शनि की ढैय्या (चंद्र राशि से चौथा या आठवाँ शनि) भी साथ खिसकती है: मीन के शनि में यह धनु और सिंह पर है, और मेष के शनि में मकर और कन्या पर।

गुरु–शनि त्रिकोण: साल का सबसे मीठा योग

2027 का सबसे सुंदर पहलू गुरु और शनि का त्रिकोण (120°) है। इसका पहला संपर्क 31 अगस्त 2026 को हुआ था, फिर 3 अप्रैल 2027 को 23° कर्क और मीन पर, यानी दो जल राशियों में, और अंतिम 12 जुलाई 2027 को 3° सिंह और मेष पर, दो अग्नि राशियों में। गुरु फैलाता है और शनि ढाँचा देता है। जब दोनों सहयोग में हों, तो परंपरा इसे बड़ी योजनाओं को ठोस रूप देने का मौसम पढ़ती है। अप्रैल के आसपास नींव और जुलाई के आसपास छत, यह क्रम इस पढ़त में अच्छा बैठता है। यह संपर्क 2020 के गुरु-शनि महायुति से शुरू हुए बीस-वर्षीय चक्र का बढ़ता हुआ त्रिकोण है।

राहु-केतु और 2027 के पाँच ग्रहण

निरयण पंचांग में राहु 6 दिसंबर 2026 से मकर में है और केतु कर्क में। पूरे 2027 यही धुरी बनी रहती है, और ग्रहण इसी के आसपास गिरते हैं:

  • 6 फ़रवरी: वलयाकार (कंकण) सूर्य ग्रहण, क़रीब 23° मकर पर। यह दक्षिण अमेरिका और अटलांटिक के ऊपर दिखेगा, भारत में नहीं।
  • 20–21 फ़रवरी: उपच्छाया चंद्र ग्रहण, 8° सिंह पर।
  • 18 जुलाई: उपच्छाया चंद्र ग्रहण, इतना हल्का कि अधिकतर कैलेंडर इसे साधारण पूर्णिमा ही गिनते हैं।
  • 2 अगस्त: खग्रास सूर्य ग्रहण, क़रीब 16° कर्क पर, पुष्य नक्षत्र में और केतु के बिलकुल पास। मिस्र के लक्सर के पास छह मिनट से ज़्यादा की पूर्णता होगी, और भारत में दोपहर बाद आंशिक ग्रहण दिखेगा।
  • 17 अगस्त: उपच्छाया चंद्र ग्रहण, मकर के आख़िरी अंश पर।

ज़्यादातर पंचांग उपच्छाया चंद्र ग्रहण पर सूतक नहीं मानते, क्योंकि चंद्रमा पर उसकी छाया आँख से मुश्किल से दिखती है। सूतक-विचार के लिए साल का असली ग्रहण 2 अगस्त का ही है।

आपकी राशि के लिए 2027

गोचर का फल भाव से पढ़ा जाता है, और पंचांग की परंपरा में भाव आपकी चंद्र राशि (जन्म राशि) से गिने जाते हैं। मोटी रूपरेखा यह रही:

चंद्र राशि गुरु: कर्क → सिंह → कन्या शनि: मीन → मेष राहु / केतु
मेष 4 → 5 → 6 12 → 1 10 / 4
वृषभ 3 → 4 → 5 11 → 12 9 / 3
मिथुन 2 → 3 → 4 10 → 11 8 / 2
कर्क 1 → 2 → 3 9 → 10 7 / 1
सिंह 12 → 1 → 2 8 → 9 6 / 12
कन्या 11 → 12 → 1 7 → 8 5 / 11
तुला 10 → 11 → 12 6 → 7 4 / 10
वृश्चिक 9 → 10 → 11 5 → 6 3 / 9
धनु 8 → 9 → 10 4 → 5 2 / 8
मकर 7 → 8 → 9 3 → 4 1 / 7
कुंभ 6 → 7 → 8 2 → 3 12 / 6
मीन 5 → 6 → 7 1 → 2 11 / 5

हर भाव का विषय देख लीजिए, साल की रूपरेखा हाथ में आ जाएगी। उदाहरण के लिए, कर्क राशि के लिए साल के पहले आधे हिस्से में उच्च का गुरु जन्म राशि पर ही बैठा है, और जून में शनि दसवें भाव, यानी कर्म भाव, में आता है। मकर राशि के लिए राहु पूरे साल जन्म राशि पर बैठा है।

इसे सचमुच कैसे इस्तेमाल करें

गोचर मौसम है, भाग्य का फ़ैसला नहीं। तालिका बताती है कि किस मौसम में हवा तेज़ है; उस हवा में क्या करना है, यह फ़ैसला आपका है। इसे निजी बनाने के तीन क़दम:

  1. अपनी चंद्र राशि जानिए। मुफ़्त जन्म कुंडली बनाइए। यह बिना खाते के, ब्राउज़र में ही चलती है। एक ईमानदार नोट: यह साइट सायन (tropical) राशिचक्र पर गणना करती है, इसलिए वहाँ की चंद्र राशि अक्सर आपकी पंचांग वाली जन्म राशि से एक राशि आगे दिखेगी। ऊपर की तालिका के लिए अपनी पंचांग वाली (निरयण) राशि ही लीजिए। दोनों राशिचक्र क्यों अलग पड़ते हैं, यह अपनी अलग कहानी है।
  2. संवेदनशील अंश देखिए। कुंडली में कोई ग्रह निरयण 0°–4° मेष या 23° कर्क के आसपास हो, तो इस साल के शनि-गुरु संपर्क वहाँ सबसे साफ़ महसूस होंगे। (हमारी सायन कुंडली में यही बिंदु क़रीब 24°–28° मेष और 17° सिंह पर दिखते हैं।)
  3. रोज़ साथ चलिए। रोज़ का राशिफल इन गोचरों को आते ही दर्ज करता है।

तारीख़ें इस साइट की पंचांग-गणना से निकली हैं, लहिरी अयनांश से निरयण में बदलकर। पश्चिमी (सायन) ज्योतिष में यही आसमान क़रीब 24° आगे पढ़ा जाता है, इसलिए पश्चिमी कैलेंडर गुरु का कन्या-प्रवेश 26 जुलाई 2027 को और शनि को पूरे साल मेष में दिखाते हैं।

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कुंडली पढ़ना एक बात है — अपनी देखना दूसरी। लगभग तीस सेकंड लगते हैं।

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